ॐ शिव
आज के सूरज की स्वेत किरणे , मन के आगन में इस तरह परवेस कर रही है |अब तक अंधकार में व्यतित जीवन केअनेक छुई पहलूओं से निर्मित मेरे अस्ताव्यता पड़े वक्तित्व को सुधरने और सवारने का संकल्प लिए ज्योती पुंज मनके माध्यम से बुद्धि में संकलित अनेक द्वंदों को पारदर्शिता पर्दान कर रहा है | चित में संजोए हुए अवगुणों कीचिंगारियों को स्वसो का आवागमन सुलगा नहीं पा रहा बुझा देता है | वैसे वैसे मन ,बुद्धि , चित पर स्वाशो व पराशक्ति का निरंतर अभिषेक हो रहा है व वक्तित्व निखार रहा है |
Monday, January 4, 2010
ॐ शिव
Posted by
shivraj singh
at
3:12 AM
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